दोस्तों poem on books in hindi में आपको बेहतरीन किताब पर कविता हिंदी में पढ़ने मिलेगी जोकि खुद हमने आपके लिए लिखी है। किताब के बारे में क्या ही बोलू मैं जितना बोलू उतना कम है।


किताब का हमारे जीवन मे बहोत महत्व है क्योंकि किताब ही ऐसा एक साथी है जो बचपन से बड़े होने तक या कहे हमेशा हमारे सदा ही साथ रहता है और हमारा साथ कभी नही छोड़ता किताब पर हिंदी कविताएँ लिखने मे मुझे बेहद अच्छा महसूस हो रहा है।


आज के जमाने मे अगर मुझे कोई पूछे कि तेरा सच्चा साथी कौन है? तो उन्हें मै कहूंगा किताब ही मेरा सच्चा साथी रहा है और हमेशा रहेगा क्योंकि उसने मुझे मेरे साथ रहकर उसके अंदर का ज्ञान मुझे दिया।


इसी मेरे बचपन से आजतक के किताब के साथ किये सफर को मैने किताबें कविता मे लिखा है जो भी जैसी भी लिखी है वो मैन खुद से लिखी है आप जरूर पढ़िए।


किताब पर हिंदी कविताएँ | Poem On Books In Hindi | किताबें कविता


किताब पर हिंदी कविताएँ | Poem On Books In Hindi
poem on kitab in hindi image

Table Of Content


  1. किताब पर कविता हिंदी में
  2. पहली किताब याद आयी कविता
  3. short poem on books in hindi
  4. books poem in hindi पुस्तक पर कविता
  5. hindi poem on books our best friend
  6. किताब से दोस्ती कविता
  7. best poem books in hindi
  8. poem in hindi on books पढ़नी है किताब कविता
  9. किताब का महत्त्व पर कविता
  10. Poem on importance of books in hindi


किताब पर कविता हिंदी में


कहा खो गयी वो किताब हमारी,

बचपन की वो पहली किताब याद आयी।


बचपन की एक बात बताऊ,

किताबों से जुड़ी कुछ याद बताऊ।


ना समझते थे तब ये किताब क्या है,

किताबों में छुपी ऐसी बात क्या है।


जब खोल किताबों को तो देखा,

रंगबिरंगी चित्र और अक्षर की रेखा।


बहुत खुश हो जाते थे हम तब,

देख रंगबिरंगी चित्र और अक्षर हम सब।


पढके जब सुनाती मैडम हमारी,

किताबों में लिखी वो कहानी प्यारी।


शांति से हम वो सुन ही लेते,

किताबों के अंदर का ज्ञान भी लेते।


तब हमको कुछ समझ है आया,

किताबों को मै तभी समझ हु पाया।


बचपन से हम बड़े हो जाते,

किताबों की साथ हमेशा ही पाते।


कहा खो गयी वो किताब हमारी,

बचपन की वो पहली किताब याद आयी।



पहली किताब याद आयी कविता


Kaha kho gayi wo kitab hamari,

Bachpan ki woh pehli kitab yaad aayi..!


Bachpan ki ek baat batau,

Kitabon se judi kuchh yaad batau..!


Na samajhte the tab ye kitab kya hai,

Kitabon mein chhupi aisi baat kya hai..!


Jab khol kitabon ko to dekha,

Rang berangi chitr aur akshar ki rekha..!


Bahut khush ho jaate the ham tab,

Dekh rang birangi chitr aur akshar hum sab..!


Padhke jab sunati maidam hamari,

Kitabon mein likhi woh kahani pyari..!


Shanti se hum wo sun hi lete,

Kitabon ke andar ka gyan bhi lete.


Tab hum ko kuch samajh hai aaya,

Kitabon ko mai ta bhi samajh hu paaya..!


Bachpan se hum bade ho jaate,

Kitabon ki sath hamesha hi pate..!


Kaha kho gayi wo kitab hamari,

Bachpan ki woh pehli kitab yaad aayi..!



short poem on books in hindi


ज्ञान की गंगा जब बहती है,

किताबों में समा जाती है।


ज्ञान का जब भंडार बन जाती,

किताब नाम से ही कहलाती।


इसका काम यही होता है,

बाँटना सबको ज्ञान होता है।


इसमें संसार का कोना कोना होता है,

उसे हमे उजागर करना होता है।


ज्ञान को हमे फैलाना होता है,

बिना किताब वो अधूरा होता है।


पढ़कर ज्ञान सुनाना होता है,

सबको जानकारी देना होता है।


किताब से ही हमे मिलता है ज्ञान,

किताब बिना कुछ भी नही आसान।


तब जाकर कुछ बन सकते है,

जब हम सब किताबें पढ़ते है।


ज्ञान की गंगा जब बहती है,

किताबों में समा जाती है।



books poem in hindi पुस्तक पर कविता


Gyan ki ganga jab behti hai,

Kitabon mein sama jati hai..!


Gyaan ka jab bhandar ban jaati,

Kitaab naam se hi kehalati..!


Iska kaam yahi hota hai,

Batana sab ko gyan hota hai..!


Isme sansaar ka kona kona hota hai,

Use hume ujagar karna hota hai..!


Gyaan ko hume failana hota hai,

Bina kitaab wo adhura hota hai..!


Padhkar gyaan sunana hota hai,

Sab ki jankari dena hota hai..!


Kitaab se hi hume milta hai gyaan,

Kitaab bina kuch bhi nahi aasan..!


Tab jaakar kuch ban sakta hai,

Jab hum sab kitaaben padhte hai..!


Gyan ki ganga jab behti hai,

Kitabon mein sama jati hai..!



hindi poem on books our best friend


ऐसी है किताब हमारी,

निभाती है दोस्ती सबसे प्यारी।


हल्की छोटीसी तू प्यारी,

ए किताब तू तो सच्ची दोस्त है हमारी।


ना बोले तू ना डोले तू,

लेकिन तू बातें सिखाती है सारी।


तुझमे है सारा संसार है बसता,

उसका सारा ज्ञान है बसता।


बचपन से आजतक सिखा सब तुझसे,

दुनिया का ज्ञान लिया सब तुझसे।


तेरे बिना हम कुछ ना होते,

दुनिया को ज्ञान फिर कैसे देते।


कभी किया ना तूने विरोध हमारा,

बिना हाथ छोड़े दिया है साथ हमारा।


तूने सब मे ज्ञान है बांटा,

तूझसे ही इंसान अपनी पहचान बनाता।


जब सब दोस्त दूर गए थे मेरे,

तू ही साथ तभीभी थी मेरे।


अगर दोस्त का सबको मै नाम बताऊ,

ए किताब बस तेरा ही बताऊ।


ऐसी है किताब हमारी,

निभाती है दोस्ती सबसे प्यारी।



किताब से दोस्ती कविता


Aisi hai kitaab hamari,

Nibhati hai dosti sabse pyari..!


Halki chhoti si tu pyari,

A kitaab tu to sachchi dost hai humari..!


Na bole tu na dole too,

Lekin tu baatein sikhati hai saari..!


Tujhme hai saara sansaar hai basta,

Uska saara gyaan hai basta..!


Bachpan se aaj tak sikha sab tujhse,

Duniya ka gyan liya sab tujhse..!


Tere bina hum kuch na hote,

Duniya ko gyaan phir kaise dete..!


Kabhi kiya na tune virodh humara,

Bina hath chhode diya hai saath hamara..!


Tune sab me gyaan hai baanta,

Tujhse hi insaan apni pehchaan banata..!


Jab sab dost door gaye the mere,

Tu hi saath tabhi bhi thi mere..!


Agar dost ka sabko mai naam bataoo,

A kitaab bas tera hi batau..!


Aisi hai kitaab humari,

Nibhati hai dosti sabse pyari..!



best poem books in hindi


किताबें किताबें सतरंगी किताबें,

हम सबको पढ़नी है ये किताबें।


कही भी मिल जाती ये किताब,

ढूंढने से मिल जाती किताबें।


इसमें है ज्ञान का भंडार समाया,

इसको है हमने रोज पढ़ने आना।


बाजू की ग्रंथालय में है जाना,

सभी किताब वही तुम पाना।


बहुत से लोग वहा पे आते,

किताबें वो कुछ कुछ पढ़ जाते।


किताबों की वहा लाइन सी है लगती,

किताबों की वहा दुनिया है चलती।


कोई किताब टी कोई पेपर है पढ़ते,

रोज नया ज्ञान वो लेकर ही जाते।


छोटी है मगर बड़ी ही ग्यानी,

सबकी प्यारी किताब हमारी।


किताबें किताबें सतरंगी किताबें,

हम सबको पढ़नी है ये किताबें।



poem in hindi on books पढ़नी है किताब कविता


Kitaben kitaben satarangi kitaben,

Hum sab ko padhni hai ye kitaben..!


Kahin bhi mil jaati ye kitaab,

Dhoondne se mil jaati kitaben..!


Ismen hai gyan ka bhandar samaya,

Isko hai humne roj padhne aana..!


Baaju ki granthalay mein hai jaana,

Sabhi kitab vahi tum paana.


Bahut se log waha pe aate,

Kitaben vo kuch kuch padh jaate..!


Kitabon ki wah line see hai lagati,

Kitabon ki waha duniya hai chalti.


Koi kitab tee koee pepar hai padhate,

Roj naya gyaan vo lekar hee jaate.


Chhotee hai magar badee hee gyaanee,

Sabakee pyaaree kitaab hamaaree.


Kitaben kitaben satarangi kitaben,

Hum sab ko padhni hai ye kitaben..!



किताब का महत्त्व पर कविता


कितना महत्व है इन किताबों का,

मिलता मौका सबको ये पढ़ने का।


पढलो तो जानो इसको तुम खास,

इसे रखो तुम हमेशा अपने पास।


रोज थोड़ा पढ़ लिया करो तुम उसको,

अंदर से जानो तुम इसको।


ये देती है फ्री में ज्ञान,

इसका करो तुम सदा सम्मान।


इसके बिना कुछ तुम जान ना पाए,

खुदको तुम पहचान ना पाए।


इसमें समाया है सारे संसार का ज्ञान,

किताब ही तो है ज्ञान का भंडार।


किताबों में ही इलाज है अपना,

बाकी तो बुरा सा सपना।


कही अनपढ़ तुम ना रह जाओ,

किताबें अगर तुम पढ़ ना पाओ।


पढ़ लिख के आगे बढ़ जाओ,

कोई ना छुए तुम्हे ऐसा बन जाओ।


कभी ना मानो जिंदगी में हार,

तभी रहे तुम्हारी जिंदगी खुशहाल।


छोटीसी किताब का महत्व जानो,

इसको तुम छोटा ना मानो।


कितना महत्व है इन किताबों का,

मिलता मौका सबको ये पढ़ने का।



Poem on importance of books in hindi


Kitna mahatva hai in kitabon ka,

Milta mauka sab ko ye padhne ka..!


Padhlo to jaano isko tum khaas,

Ise rakho tum hamesha apne paas..!


Roj thoda padh liya karo tum usko,

Andar se jaano tum isko..!


Ye deti hain free mein gyan,

Iska karo tum sada sammaan..!


Iske bina kuchh tum jaan na paye,

Khud ko tum pehchan na paye..!


Isme samaaya hai saare sansaar ka gyaan,

Kitaab hi to hai gyan ka bhandar..!


Kitaabon mein hi ilaaj hai apna,

Baki to bura sa sapna..!


Kahi anpadh tum na reh jao,

Kitaben agar tum padh na pao..!


Padh likh ke aage badh jao,

Koi na chhuye tumhe aisa ban jao..!


Kabhi na maano zindgi mein haar,

Tabhi rahe tumhari zindagi khushhaal..!


Chhoti si kitab ka mahatva jaano,

Isko tum chhota na maano..!


Kitna mahatva hai in kitabon ka,

Milta mauka sab ko ye padhne ka..!



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कुछ आखरी शब्द :


मैने poem on books in hindi में जो मैने लिखा है वो मेरा बचपन से आजतक का किताबों का अनुभव लिखा है जो कि कविता के माध्यम से किताब पर कविता हिंदी में आप के सामने पेश किया है।


मुझे ऐसा लगता है कि आपका भी अनुभव इसमें मेरे जैसा या थोड़ा अलग सा रहा होगा लेकिन किसी किसी को तो किताबें ही नही मिलती तो उसका क्या वो तरसते है किताबे पढ़ने के लिए ऐसे लोगों को आप जरूर अपने किताबें पढ़ने दे सकते है।


और आखिर की बात आशा करता हु की आपको मेरी ये किताब पर हिंदी कविताएँ अच्छी लगी होगी तो जरूर बताएं।

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