दोस्तों आप पढ़ रहे है love story of school life in hindi आपने इस लव स्टोरी वाले कहानी के (Part-1) और (Part-2) तो पढ़े ही होंगे अगर नही पढ़े तो पढियेगा जरूर क्योंकि तभी आपको ये true love story समझ मे आएगी।


Love Story Of School Life In Hindi | school life love story part 3


Love Story Of School Life In Hindi | school life love story part 3
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अब वो कहा होगी कहानी


तो मै जब स्कूल के रास्ते निकल पड़ा तब मैने उसके घर के पास से जो रास्ता निकलता है स्कूल के लिए उसी रास्ते से जाने लगा ताकि मै उसके साथ स्कूल जा सकू।


तो मै निकल पड़ा और उसके घर के सामने से जा रहा था तो वो मुझे घर के अंदर ही दिखाई दी शूज पहन रही थी। तो मै थोड़ा रुक गया और उसके आने का इंतजार करने लगा।


थोड़ी देर बाद वो गेट से बाहर आयी और मै बहुत खुश हो गया था। उसके बाद उसने मुझे इशारा किया कि यहा से जल्दी चलो पीछे माँ खड़ी है।


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तो मै उसके पीछे और वो मेरे सामने चलने लगी। थोड़ी देर ऐसेही चलते रहे और हम दोनों उसके घर से दूर आ गए।फिर हम दोनों साथ साथ चलने लगे।


उसने मुझे पूछा कि क्यों तुम शैतानी करते हो आज मेरे घर के तरफ से क्यों आ गए तुम अगर दिख जाते तो मैंने भी बोल दिया तो क्या होता उसने कहा कि मेरे घरवाले बहोत स्ट्रिक्ट है।


मैने कहा मेरे भी घरवाले वैसेही है लेकिन मैं तो नही डरता वो बोली लेकिन मै डरती हु इसीलिए आज से तुम मेरे घर के तरफ से नही आओगे समझे मैने बोला गुस्सा मत करो नही आऊंगा।


और चुपचाप चलने लगा तो वो हसी और बोली ठीक है आते जाओ लेकिन थोड़ा दूर खड़े रहते जाओ फिर हम वहा से साथ मे स्कूल जाते जाएंगे। तो मैने भी हसके बोला ये हुई ना बात।


और हम बातें करते करते स्कूल पहुच गए।और क्लास में बैठे तो वही थोड़ा उसका मुझे देखके शर्माना और मन ही मन मुस्काना बाद अच्छा लगता था मुझे एक दिन टीचर को पता चल गया कि कुछ खिचडी पक रही है इन दोनों मे तो टीचर ने मुझे वहा से उठाके दूसरी जगह बैठने को कहा।


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मैने टीचर से कहा क्यों टीचर क्या हो गया तो टीचर बोले कि क्युके मैने कहा इसलिए। तो मै बहुत नाराज हो गया था उस दिन और वो भी नाराज थी। और मेरे जगह पे दूसरा लड़का बैठ गया।


उस दिन टीचर का भी गुस्सा आया था मुझे फिर आधी छुट्टी हो गयी फिर हम सब दोस्त खाना खाने चले गए। और उसके बाद हम सब मिलके खेलने लगे तो उसने मुझे आवाज़ दी और बोली कि आज से आप मुझसे बात मत करते जाओ।


उसने ऐसा कहते ही मेरे आँख में आँसू आने लगे। और मैने उससे पूछा कि क्या हो गया कि मैं आपसे बात न करू उसने कहा कि पहले रोना बंद करो। मैने कहा कि उसे छोड़ो तुम पहले बताओ क्यों मै तुमसे बात ना करू।


तो उसने बोला की टीचर ने आपको वह से उठाया तो टीचर मेरे घर वालों को बता देंगे कि मैं आपसे बात करती हूं ज्यादा इसलिए आप कल से मेरे घर के रास्ते भी मत आया करो स्कूल जाने के लिए। ऐसा बोल के चली गयी।


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उस दिन मै बहुत नाराज था और स्कूल छूटने के बाद अकेला घर चला गया। और उस दिन खेलने मे मन लग रहा था नाही कुछ खाने मे लेकिन माँ तो माँ होती है ना आखिर क्या हो गया तुझे ऐसा पूछा और जबरदस्ती खाना खिला दिया।


दूसरे दिन मै स्कूल नही गया उसके अगले दिन छुट्टी थी तो सोमवार को स्कूल गया। फिर अपने जगे पे बैठ गया।ना किसी से बात की नाही किसी के साथ खाना खाया। ऐसे ही दिन बीतते गए तो कुछ दिनों बाद मुझे कुछ अलग ही दिखा।


की वो लड़का जो मेरे जगे पे बैठा था वो उस लड़की से बात करने लगा। और वो भी उससे बात कर रही थी।वो भी हसके ये देख मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन मैने कुछ नही बोला और उस दिन चुपचाप बैठे रहा।


दूसरे दिन तो हद ही हो गयी वो दोनों तो साथ साथ खेलने लगे और पकड़ा पकड़ी खेल में वो लड़का सिर्फ उसीको ही पकड़ता था और उसका हाथ पकड़ के वो फिर दूसरे को पकड़ते थे।


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खाना भी आजकल साथ मे ही खाने लगे उस दिन मेरा गुस्सा बहुत बढ़ गया और मैने उस लड़के को उसीके सामने बहुत मारा हम दोनों में लड़ाई शुरू हो गयी दोनो ने एक दूसरे को खूब मार फिर मैंने उसको नीचे गिराया और उसको चोट लग गयी।


फिर वो लड़का रोने लगा तो मैंने उसे छोड़ दिया।उस दिन तो उस लड़के को मार के बडा अच्छा लगा था मुझे लेकिन जो मेरा प्यार था वो मुझे गुस्से से देख रही थी। जैसे के वो मुझे आज मार ही डालेंगी।शायद उस लड़के से प्यार हो गया हो उसे थोड़ा मेरे से अच्छा भी दिखता था।


उसका रंग कुछ ज्यादा ही गोरा था और मै थोड़ा सावला दिखता था उस टाइम कलर की भी डिमांड थी शायद लड़कियों को होनी भी चाहिए।हम तो जैसे थे वैसे ही अच्छे थे।


उस दिन उस लड़के ने टीचर के पास मेरी शिकायत कर दी और मुझे टीचर ने छड़ी से हाथ और पाव पे खूब मार और ऊपर से डांटा वो अलग और मै टीचर के नज़र अच्छे लड़के से एक बुरा लड़का बन गया।


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फिर क्या मैने मेरे दोस्तों के साथ रहना शुरू कर दिया उनके साथ खेलता घूमता और पढ़ाई तो खूब करने लगा था मै उसके बाद घर जाके पापा से कुछ सिख लेता मेरे पापा टीचर जो थे।


थोड़े दिन बाद, हमारी 4th की फाइनल एग्जाम थी। और उसका टाइम टेबल भी आ गया था। तो मैंने अपने पढ़ाई पे पूरा ध्यान लगा दिया। और रोज पढ़ाई करता था।अब एग्जाम को 2 ही दिन बचे थे।


तब एक बार उसके तरफ देखने का मन किया तो मैंने उसे उस दिन देखा तो बड़ी ही खूबसूरत परी जैसी दिख रही थी वो और उसके बालो का वो बेल्ट आज भी बहुत अच्छी तरह पता है मुझे रेड कलर का था।


तो मै जब उसके तरफ देख रहा था तो अचानक उसकी नज़र मेरी तरफ पड ही गयी और गुस्से से देख आंखे चुरा ली। गुस्से से ही सही लेकिन उसका गुस्सा अच्छा लगता था मुझे अब सिर्फ एक दिन बचा था एग्जाम को और मैं पढ़ाई करने लगा।


जब एग्जाम का दिन आया तो मै जल्दी से घर से स्कूल के लिए निकला और जल्दी स्कूल पहुच के थोड़ा पढ़ लिया। उस दिन मुझे वो स्कूल के गेट से आते हुए दिखी। तो मैने मन मे ही सोच लिया कि आज तेरा एग्जाम पेपर अच्छा जाने वाला है।


उसका स्कूल आते ही मै उसके तरफ दौड़ के चला गया और उसको best of luck बोला तो उसने कोई भी जवाब नही दिया और प्रेयर के लिए चली गयी।मैने सोचा चलो छोड़ो आज एग्जाम है।


लेकिन जैसे ही प्रेयर हो गयी और हम सब एग्जाम देने क्लास पहुचे तब मेरे बाजू से आवाज़ आयी हल्की सी thank you और वो आवाज़ उसी की थी । मैने उसके तरफ देखा और वो हल्की सी स्माइल देखे अपने जगह पे बैठी और मेरा भी क्या नसीब था।


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की वो मेरे बाजू में ही बैठी थी इसको बोलते नसीब तो उस दिन मै तो बहुत खुश था और मै अपना पेपर लिखने लगा। एग्जाम पेपर लिखते वक्त मैने किसी के तरफ भी नही देखा बस पेपर लिखता रहा।


और मेरा पेपर जल्दी हो गया तब मैने जोरोकि सांस ली और थोड़ा रुक के उसके तरफ देखा तो वो पेपर लिख रही थी और मैं लगातार उसके तरफ ही देखता रहा। ऐसेही हमारी एग्जाम पूरी हो गयी और स्कूल को छुट्टियां लगने वाली थी।


तो मैने सोचा कि एक बार उससे बात कर लूं तो मैने उसके साथ बात की तो उसने भी उस दिन मुझसे खूब बातें की करीब करीब एक घंटा बात की, शायद वो हमारी आखरी बात हो सकती है ऐसा मुझे थोड़ा लगा था क्योंकि हमारा स्कूल 4थी तक ही था।


उसके बाद हमे दूसरी स्कूल में दाखिला लेना पड़ता था। तो उस दिन हमने खूब बातें की लेकिन उस टाइम कुछ समझता नही था हमे की क्या बोले प्रोपोज़ क्या होता है कैसे करते है उस वक़्त तो सिर्फ दिल को छू जाना ही काफी था।


और शायद वही प्यार अच्छा था अब तो दिल टूट जाता है और इंसान डिप्रेशन का शिकार होता है। तो सही दुनिया बदलती है।


फिर कुछ महीने बाद मेरा रिजल्ट आया और मै पास हो गया था।लेकिन जब हम रिजल्ट लेने स्कूल में बुलाया था तब वो नही आयी थी।तो मैंने उसके घर के तरफ भी जाके देखा तो घर मे टाला लगा था।


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मुझे लगा छुट्टियों में गाँव गयी होगी। दिन बीतते गए और मैने दूसरे स्कूल में दाखिला ले लिया मुझे लगा वो इस स्कूल में जरूर आएगी लेकिन वो उस स्कूल में दिखी ही नही दो महीने जो हो गए थे।


मैने उसके दोस्त को जब पूछा तो किसी को भी पता नही था।तो एक दिन मै उसके घर के बाजू वाले अंकल को पूछा तो उन्होंने बताया कि बेटा वो तो घर छोड़के चले गए तो मैंने पूछा कहा तो उन्होंने बोला पता नही।


उस दिन से मै बहुत अकेला पड़ गया था। एग्जाम पेपर के बाद वाली हमारी वो एक घंटा वाली बातें आखरी बातें साबित हुई। और 5वी मैने उस स्कूल में की उसके बाद मै भी पापा की ट्रांसफर होने के कारण वो शहर छोड़ दूसरे शहर चला गया।


ये मेरी school life love story मै आज भी बहुत याद करता हु और उस लड़की को भी जिसने जाते वक्त भी एक स्माइल जरूर दी थी मेरी तरफ देख के।


कुछ बाते अधूरी रह गई,

पूरा होने के लिए,

तुझसे कभी तो मिलूंगा,

तेरी वो हँसी फिर से देखने के लिए।


ये थी मेरी true love school life story तो कैसी लगी जरूर बताएं।


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