दोस्तों matlabi duniya matlabi log shayari में आपको मतलबी लोगों की शायरी पढ़ने मिलेगी जोकि सब इसका अनुभव ले चुके होंगे और आज तो स्वार्थी लोगों की कमी नही है इस दुनिया मे जो सिर्फ अपने लिए जीते है।


अपने लिए जीना अच्छी बात है लेकिन हम भूल जाते है कि हम एक देश मे रहते है और हम एक परिवार है इसीलिए कभी दूसरे के लिए भी जीना चाहिये ज्यादा नही तो थोड़ा ही सही।


क्या आप मतलबी ज़िन्दगी जिना पसंद करोगे या फिर एक अच्छी ज़िन्दगी जिना पसंद करोगे? ये तो आपके हाथ मे है हम तो एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहे है इस मतलबी लोग पर शायरी के माध्यम से।


अगर आपको ये मतलब शायरी पसंद आये तो हमे जरूर बताएं क्योंकि हमने थोड़ी कोशिश की है कि आजकल लोग मतलबी कैसे बन गए ।


मतलबी लोग पर शायरी | Matlabi Duniya Matlabi Log Shayari | स्वार्थी लोग शायरी | Selfish Shayari


मतलबी लोग पर शायरी | Matlabi Duniya Matlabi Log Shayari
Matlabi duniya Matlabi log shayari image

Matlabi log par Shayari


बारिश ने भी धोखा दिया आज,

पानी को ना बरसाके,

बारिश भी मतलबी बन गयी,

दुनिया के लोगों को रुला के।


Barish ne bhi dhokha diya aaj,

Pani ko naa barsake,

Barish bhi matlabi ban gayi,

Duniya ke logon ko rula ke..!

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मतलबी दुनिया मतलबी लोग,

कहा से आते है ये अजीबो गरीब लोग।


Matlabi duniya matlabi log,

Kaha se aate hai ye ajibo garib log..!

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चंद मिनटों का था वो सफर,

जा रहे थे हम दोनों एक दूजे का हाथ पकड़,

ठोकर क्या लग गई सफर में मुझे,

दूजा छोड़ गया हाथ मेरा,

करने बेमतलब का मतलबी सफर।


Chand minto ka tha wo safar,

Ja rahe the hum dono ek duje ka hath pakad,

Thokar kya lag gai safar me mujhe,

Duja chhod gaya hath mera,

Karne bematlab ka matlabi safar..!

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छोड़ गए थे सारे मुझको,

रह गया था मै अकेला,

एक बात बता दू यारो तुमको,

है ये मतलब का ज़माना।


Chhod gaye the sare mujhko,

Reh gaya tha mai akela,

Ek baat bata du yaro tumko,

Hai ye matlab ka zamana..!

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प्यार में कसमें वादे देने वाले,

प्यार में धोखा देकर चले जाने वाले,

याद रखो किसीका दिल तोड़कर जाना,

मतलबी प्यार कहलाता है।


Pyar me kasme wade dene wale,

Pyar me dhokha dekar chale jane wale,

Yaad rakho kisika dil todkar jana,

Matlabi pyar kehlata hai..!

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Matlabi shayari hindi | स्वार्थी लोग शायरी


छोड़ के जाने वाले,

वापस भी आया करते है,

मतलबी लोगों से धोखा खाकर।


Chhod ke jane wale,

Wapas bhi aaya karte hai,

Matlabi logon se dhokha khakar..!

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यु न बदलो प्यार में उनके,

की वही न बदल जाये एक दिन,

मतलब का प्यार करने वालों,

कही वही न जाये तुमको छोड़ एक दिन।


U na badlo pyar me unke,

Ki wahi na badal jaye ek din,

Matlab ka pyar karne walon,

Kahi wahi na jaye tumko chhod ek din..!

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दिखती तो थी तू खूबसूरत,

मै फ़िदा भी था तुझपे,

मैंने भी मतलबी लोगों को देखा है,

तू गई थी बिलकुल उनपे।


Dikhti to thi tu khubsurat,

Mai fida bhi tha tujhpe,

Maine bhi matlabi logon ko dekha hai,

Tu gai thi same unpe..!

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दोस्त देखे है मैंने बहुत,

जो दोस्त मुश्किल घड़ी में काम आये,

लेकिन तुमसा मतलबी दोस्त आज तक नहीं देखा।


Dost dekhe hai maine bahut,

Jo dost mushkil ghadi me kaam aye,

Lekin tumsa matlabi dost aaj tak nahi dekha.!

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टूट जाते है वो रिश्ते,

जहा मतलबी लोग रहते है,

बिखर जाते है वो सपने,

जहां अपने नहीं होते है।


Tut jate hai wo rishte,

Jaha matlabi log rehte hai,

Bikhar jate hai wo sapne,

Jaha apne nahi hote hai..!

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Matlabi dost shayari in hindi


पड़ा रहता था दोस्तों के साथ,

के घर नहीं जाता था मैं आधी आधी रात,

पैसे ख़त्म क्या हो गए,

साले दोस्त भी मतलबी बन छोड़ के चले गए।


Pda rehta tha doston ke sath,

Ke ghar nahi jata tha mai adhi adhi raat,

Paise khatm kya ho gaye,

Saale dost bhi matlabi ban chhod ke chale gaye..!

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कह दे उस चाय वाले को,

की दोस्तों को चाय नहीं पिलाये,

अक्सर चाय पीने के बाद मतलबी दोस्त,

उठ कर चले जाते है।


Keh de us chai wale ko,

Ki dosto ko chai nahi pilaye,

Aksar chai pine ke baad matlabi dost,

Uth Kar chale jate hai..!

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रहता कुछ और है,

करते कुछ और,

साले मतलब के दोस्त,

काम होते ही भागते कही और है।


Rehta kuchh or hai,

Karte kuchh or,

Sale matlab ke dost,

Kam hote hi bhagate kahi or hai,...!

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अकेले चलना सीखो मेरे यारों,

मतलबी दोस्तों का तो ढेर है,

उनको जाना कही और है,

हमे जाना कही और।


Akele chalna sikho mere yaron,

Matlabi dosto ka to dher hai,

Unko jana kahi or hai,

Hume jana kahi or..!

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याद किया करो हमे हमसे दुर रह के,

बाते भी कर लिया करो कभी फ़ोन पे,

मतलब की दोस्ती नहीं कोई काम की,

दोस्ती निभाया करो कभी दिल से।


Yaad kiya karo hume humse dur reh ke,

Bate bhi kar liya karo kabhi phone pe,

Matlab ki dosti nahi koi kaam ki,

Dosti nibhaya karo kabhi dil se..!

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Matlabi shayari love


मतलब के प्यार पर,

भरोसा रखो मेरे यारो,

ये आखिर छोड़ ही जाता है।


Matlab ke pyar par,

Bharosa rakho mere yaaro,

Ye akhir chhod hi jata hai..!

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कातिल नज़रों से तीर मारा उसने मुझको,

अच्छा हो गया मैं हट गया,

जिसको लगा वो मतलबी प्यार का शिकार हो गया।


Katil nazro se tir mara usne mujhko,

Achha ho gya mai hat gaya,

Jisko laga wo matlabi pyar ka shikar ho gaya..!

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कहती थी प्यार करती हूँ तुझसे,

कभी रूठ न जाना तुम मुझसे,

खुद गुम हो गयी वो मुझे छोड़के,

मतलब का नकाब पहन कर।


Kehti thi pyar karti hu tujhse,

Kabhi ruth na jana tum mujhse,

Khud gum ho gayi wo mujhe chhodke,

Matlab ka nakab pahan kar..!

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कही लोगो ने इश्क़ को मतलबी समझ लिया,

छोड़ के तो इश्क़ को इंसान जाता है,

इश्क़ तो वही रह जाता है।


Kahi logo ne ishq ko matlabi samajh liya,

Chhod ke to ishq ko insaan jata hai,

Ishq to wahi reh jata hai..!

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खूबसूरत आँखों से, 

देखा करती थी वो मुझको,

बेमतलब प्यार समझ बैठा था मैं उसको।


Khubsurat aankhon se, 

Dekha karti thi wo mujhko,

Bematlab pyar samajh baitha tha mai usko..!

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Matlabi shayari in hindi 2 line


उसको कॉल किया उसने उठाया नहीं,

अपने मतलबी प्यार को जताया नहीं।


Usko call kiya usne uthaya nahi,

Apne matlabi pyar ko jataya nahi..!

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कहते थे लोग मतलबी लोगों से दूर रहो,

मैंने बिना सोचे ही उनसे प्यार कर लिया।


Kehte the log matlabi logon se dur raho,

Maine bina soche hi unse pyar kar liya..!

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दूर न जाना हमसे कहते थे हम उनसे,

मतलबी निकली वो गयी न मुझे छोड़ के।


Dur na jana humse kehte the hum unse,

Matlabi nikli woh gayi na mujhe chhod ke..!

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अंधेरे में जी रहा हु अभी,

मतलबी लोगों से पाला जो पड़ा था मेरा।


Andheri me ji raha hu abhi,

Matlabi logon se pala jo pda tha mera..!

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कोशिश तो की थी अकेले रहने की,

कमबख्त लोग मतलबी कहने लगे।


Koshish to ki thi akele rehne ki,

Kambakht log matlabi kehne lage..!

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मतलबी लोग की शायरी


जो जैसा दिखता है वो वैसा होता नहीं,

जो होता है वो वैसा दीखता नहीं,

इस मतलब की दुनिया में कोई किसी का होता नहीं।


Jo jaisa dikhta hai wo waisa hota nahi,

Jo hota hai wo waisa dikhta nahi,

Iss matlab ki duniya me koi kisi ka hota nahi..!

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पास रहो तो अच्छा है,

दूर जाऊ तो बेकार है,

कैसे कहूँ इन् मतलबी लोगों से,

के प्यार मेरा अभी भी उनसे सच्चा है।


Paas raho to acha hai,

Dur jau to bekar hai,

Kaise kahu inn matlabi logon se,

Ke pyar mera abhi bhi unse sachha hai..!

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ये दुनिया मतलब की है यारो,

इनसे दोस्ती करने से अच्छा है,

अकेले ही जी लूं।


Ye duniya matlab ki hai yaro,

Inse dosti karne se achha hai,

Akele hi ji lu..!

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क्या मतलबी दुनिया है यारो,

ये सिर्फ पैसो के लिए प्यार करती है,

किसी ने सच ही कहा है,

ये प्यार नहीं सिर्फ धोखा करती है।


Kya matlabi duniya hai yaro,

Ye sirf paiso ke liye pyar karti hai,

Kisi ne sach hi kaha hai,

Ye pyar nahi sirf dhokha karti hai..!

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अपने मतलब के लिए जीना,

कोई जीना नहीं होता,

कभी दुसरो के लिए थोड़ा जी कर तो देखो,

उससे अच्छा कोई सच्चा प्यार नहीं होता।


Apne matlab ke liye jina,

Koi jina nahi hota,

Kabhi dusro ke liye thoda ji kar to dekho,

Usse acha koi saccha pyar nahi hota..!

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कुछ आखरी अल्फ़ाज़ :


तो कैसी लगी हमारी ये matlabi duniya matlabi log shayari हिंदी में आपको पढ़ कर जरूर अच्छा लगा होगा क्योंकि ये मेरे खुद से लिखी हुई मतलबी लोग पर शायरी है।


अगर आपको ये स्वार्थी लोग शायरी सच मे अच्छी लगी हो तो इसे थोड़ा शेयर भी कर लिया करो या फिर अपने स्टेटस में रखो एक ही बात है।


एक बात तो जरूर कहना चाहूंगा कि इस मतलबी दुनिया का हिस्सा आप ना बनो तभी तो ये दुनिया मतलबी नही बनेगी और अपनो का और लोगों का हमेशा सहारा बनो बीना किसी मतलब के। जय हिंद जय भारत ।

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