दोस्तों जो आप कविता पढ़ने जा रहे हो वो jungle poem in hindi पर आधारित है।जंगल की कविता लिखने का हेतु ये है कि वन का संरक्षण हम सभी को करना है वन के महत्व और इसके बारे मे समाज मे जागरूकता लानी है।


दोस्तों आज अगर जंगल या वन कह लो है तो हम है पशु, पक्षी और अन्य सभी जीव वन पर ही आधारित है। अगर शुद्ध वायु कोई दे सकता है तो वो सिर्फ वृक्ष ही है।


इसीलिए लगातार जो वन तोड़े जाते है इंसानो ने उन्हें तुरंत रोक देना चाहिए। और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। forest poem हमने इसीलिए लिखी है कि आप को हमारे कविता के माध्यम से कुछ सिख मिले और आप भी इसे सभी को बताए।


Jungle Poem In Hindi | जंगल की कविता | Forest Poem


Jungle Poem In Hindi | जंगल की कविता | Forest Poem
jungle poem in hindi images

जंगल पर जंगल की कविता


जंगल की है बात निराली,

सबको देती है खुशहाली।


सबका जीवन उसपे है टिकता,

उसका फल सब को है मिलता।


आप सब को एक बात बताए,

सबको जंगल का महत्व है बताये।


सब को रखना है उसका ध्यान,

कोई न काटे जंगल के ये पेड़ महान।


जंगल है जानवरो का स्थान,

उनको ना करो तुम परेशान।


पशु पक्षी है जंगल के रक्षक,

कोई ना बनाये उनको भक्षक।


जंगल से हरियाली छाती,

ये सब हम को है भाती।


लो सब तुम एक प्रण,

तोड़ेंगे नही हम कोई भी वन।



Jungle poem hindi


Jungle ki hai baat nirali,

Sabko deti hai khushhali..!


Sabka jeevan uspe hai tikta,

Uska phal sabko hai milta..!


Aap sabko ek bataye,

Sabko jungle ka mahatva hai bataye..!


Sab ko rakhna hai uska dhyaan, 

Koi na kate jungle ke ye ped mahaan..!


Jungle hai janwaro ka sthan, 

Unko na karo tum pareshaan..!


Pashu pakshi hai jangal ke rakshak, 

Koi na banaye unko bhakshak..!


Jungle se hariyali chhati, 

Ye sab hum ko hai bhati..!


Lo sab tum ek pran, 

Todenge na hum koi bhi van..!



Jungle book poem in hindi


कितना बडा है ये वन,

दिखे कितना है सुंदर।


झाँक के देखे हम सबझन,

आखिर क्या है इसके अंदर।


आखिर हम सब झाँक ना पाए,

हम सब कुछ भी देख ना पाए।


कितना घना है ये जंगल,

देखते ही दिल हुआ मंगल।


वन मे पंछी किलबिल किलबिल चिल्लाये,

वन के बाहर सुंदर आवाज़ है आये।


आखिर हम गए अंदर,

सामने ही दिखे हमको बंदर।


मोर,पपीहा, कोयल गाये,

दिखे हमे उन सब के साये।


रंगबिरंगी तितलियाँ इधर उधर मटकाए,

छोटे फूलों पे वो बैठ जाये।


छोटी नदियाँ बहती जाए,

खूबसूरत वो नजारा मन को भाए।


शांति का संदेश दिलाये,

ऐसा लगे वन मे ही रह जाये।


कितना बडा है ये वन,

दिखे कितना है सुंदर।



Kitna bada hai ye van


Kitna bada hai ye van, 

Dikhe kitna hai sundar..! 


Jhaank ke dekhe hum sab jhan, 

Aakhir kya hai iss ke andar..! 


Aakhir hum sab jhaank na paye, 

Hum sab kuchh bhi dekh na paye..!


Kitna ghana hai ye jungle, 

Dekhte hi dil hua mangal..! 


Van me panchhi kilbil kilbil chillaaye, 

Van ke baahar sundar awaz hai aaye..!


Aakhir hum gaye andar, 

Samne hi dikhe hamko bandar..! 


Mor,papiha, koyal gaaye, 

Dikhe hame un sab ke saaye..! 


Rang birangi titliyan idhar udhar matkaye, 

Chhote phoolon pe wo baith jaye..! 


Chhoti nadiya behti jaye, 

Khoobsurat wo nazara man ko bhaye..! 


Shanti ka sandesh dilaye, 

Aisa lage van me hi reh jaye..! 


Kitna bada hai ye van, 

Dikhe kitna hai sundar..!



वन पर कविता | poem on jungle in hindi


ऐसा है ये जंगल हमारा,

सबसे प्यारा सबसे न्यारा।


दिखे जंगल से ही प्यारा,

धरती का ये रूप निराला।


जंगल छाया सबको देता,

सबका दुख वो हर लेता।


पशु पक्षी को सहारा है देता,

उसके बदले कुछ ना लेता।


सबको फल खाना है देता,

सबकी भूक वो है मिटाता।


शुद्ध वायु हम सबको देता,

दूषित वायु को बढ़ने ना देता।


वृक्ष ही काले घन है लाता,

हम सब पे बारिश बरसाता।


पानी की कमी पूरी है करता,

वही वृक्ष का वन कहलाता।


यही रहे हम सब को ध्यान,

क्या मिला हमको इससे ज्ञान।


उनको है जिने का अधिकार,

ये मूर्ख मानव काटो ना इसे तुम बार बार।


दिखे जंगल से ही प्यारा,

धरती का ये रूप निराला।



Aisa hai ye jungle hamara


Aisa hai ye jungle hamara, 

Sabse pyara sabse nyara..! 


Dikhe jungle se hi pyara, 

Dharti ka ye roop nirala..! 


Jungle chhaya sabko deta, 

Sabka dukh wo har leta..! 


Pashu pakshi ko sahara hai deta, 

Uske badle kuchh na leta..! 


Sabko phal khana hai deta, 

Sab ki bhook wo hai matata..! 


Shudh vayu hum sabko deta, 

Dushit vayu ko badhne na deta..! 


Vriksh hi kale megh hai lata, 

Hum sab pe barish barsaata..! 


Pani ki kami poori hai karta, 

Wahi vriksh ka van kehlata..! 


Yahi rahe hum sab ko dhyan, 

Kya mila hamko isse gyan..! 


Unko hai jine ka adhikar, 

Ye murkh manav kato na ise tum baar baar..! 


Dikhe jungle se hi pyara, 

Dharti ka ye roop nirala..!



सातपुडा के जंगल कविता का भाव सौंदर्य 


सतपुडा का जंगल हमारा,

घना अंधेरा सवेरे भी छाया।


बड़े पत्ते छोटे पत्ते,

जंगल के ये प्यारे पत्ते,


हरे भरे इतराते पत्ते,

मन को बहुत लुभाते ये पत्ते,


टप टप टप बारिश जब आये,

हरा भरा जंगल ये कर जाए।


जंगल मे बारिश जब आये,

पत्तो पे बूंदे जमा हो जाये।


छोटे पौधे भी उग जाए,

उसपे तितलियाँ मंडराए।


उसको देख कोयल गाना गाये,

मोर भी नाचने लग जाये।


जंगल का राजा ऐसे घुर्राये,

उसे देख हिरण घबराए।


नदियों मे झरने बन जाये,

सभी जीव उसका पानी पीने जाए।


सबका है जंगल ही बसेरा,

रोज होता है एक नया सवेरा।


सतपुडा का जंगल हमारा,

घना अंधेरा सवेरे भी छाया।



hindi jungle poems


Satpuda ka jungle humara, 

Ghana andhera savere bhi chhaya..! 


Bade patte chhote patte,

Jungle ke ye pyare patte..! 


Hare bhare itraate patte, 

Man ko bahut lubhaate ye patte..! 


Tap tap tap baarish jab aaye, 

Hara bhara jungle ye kar jaye..!


Jungle me barish jab aaye, 

Patto pe boonde jama ho jaaye..! 


Chhote paudhe bhi ug jaye, 

Uspe titliyan mandraye..! 


Usko dekh koyal gaana gaye, 

Mor bhi nachne lag jaaye..! 


Jungle ka raja aise ghurraaye, 

Use dekh hiran ghabraye..! 


Nadiyon me jharne ban jaaye, 

Sabhi jeev uska pani pine jaye..! 


Sabka hai jungle hi basera, 

Roj hota hai ek naya savera..! 


Satpuda ka jungle humara, 

Ghana andhera savere bhi chhaya..!



वन संरक्षण पर कविता हिंदी


कितना मूर्ख बना ये मानव,

बन के रह गया एक दानव।


वृक्ष की तोड़ करता ये मानव,

कैसे खुश रहता है ये दानव।


माना सब कुछ ठीक नही है,

खेतों मे भी पिक नही है।


भूखे भी तो नही सो पाते,

घर पे ही तो खाना खाते।


तुमको भी तो पता होता है,

खाना पेडों से ही मिलता है।


फिर भी तोड रहे है वन को,

आज की छोड समझ के कल को।


आज अगर बचाए वन को,

स्वस्थ रहेंगे बच्चे कल को।


वन को है बचाना हमको,

प्रदूषण रहित बनाना है सबको।


हरियाली को टिकाना हमको,

यही बात सबको समझाना है हमको।


समझ नही आता है मुझको,

कैसे समझ नही पाता ये मानव मुझको।


कितना मूर्ख बना ये मानव,

बन के रह गया एक दानव।



jungle bachao poem in hindi


Kitna murkh bana ye manav, 

Ban ke rah gaya ek danav..!


Vriksh ki tod karta ye manav, 

Kaise khush rehta hai ye danav..!


Mana sab kuch theek nahi hai, 

Kheton mein bhi pik nahi hai..!


Bhookhe bhi to nahi so paate, 

Ghar pe hi to khana khate..!


Tumko bhi to pata hota hai, 

Khana pedon se hi milta hai..!


Phir bhi tod rahe hai van ko, 

Aaj ki chhod samajh ke kal ko..! 


Aaj agar bachaye van ko, 

Swasth rahenge bachche kal ko..! 


Van ko hai bachana humko, 

Pradushan rahit banana hai sabko..!


Hariyali ko tikana hamko, 

Yahi baat sab ko samjhana hai humko..! 


Samajh nahi aata hai mujhko, 

Kaise samajh nahi pata ye manav mujhko..!


Kitna murkh bana ye manav, 

Ban ke rah gaya ek danav..!



Poem on forest conservation in Hindi


सब जीवन को ही चाहते है,

सबसे ज्यादा प्यार जीवन को ही करते है।


ये बात कुछ समझ ना आयी,

पेड़ तुम क्यों तोड़ते हो भाई।


उसपे ही जीवन है हमारा,

वन को है तुम सब का जीवन प्यारा।


सिर्फ एक नही रहते इस धरती पे,

उसने है सबका जीवन सवारा।


एहमियत तुम दो सब उनको,

देता वो खुशी हम सब को।


जंगल की है एक परिभाषा,

तोडे ना उसको यही है आशा।


खुदका स्वार्थ तुम अब छोड़ो,

पेड़ काटने का निच्छय तुम मोड़ो।


पशु पक्षी का यहाँ बसेरा,

लगे जंगल हम सब को प्यारा।


इनकी तुम जान ले लोगे,

खुद को तुम पहचान ना पाओगे।


इसीलिए कहता हूं सबको,

ना काटो ये पेड बोलो ये सभी को।


सब जीवन को ही चाहते है,

सबसे ज्यादा प्यार जीवन को ही करते है।



Poem on save forest in hindi


Sab jivan ko hi chahte hai,

Sabse jyada pyar jivan ko karte hai..!


Ye baat kuch samajh na aayi, 

Ped tum kyon todte ho bhai..!


Uspe hi jeevan hai humara, 

Van ko hai tum sab ka jeevan pyaara..!


Sirf ek nahi rehte is dharti pe, 

Usne hai sabka jeevan sawara..!


Ehamiyat tum do sab unko, 

Deta woh khushi hum sab ko..!


Jungle ki hai ek paribhasha, 

Tode na usko yahi hai aasha..!


Khud ka swarth tum ab chhodo, 

Ped katne ka nichchhay tum modo..!


Pashu pakshi ka yahan basera, 

Lage jungle hum sab ko pyaara..!


Inki tum jaan le loge, 

Khud ko tum pehchan na paoge..!


Isiliye kehta hoon sab ko, 

Na kato ye ped bolo ye sabhi ko..!


Sab jivan ko hi chahta hai, 

Sab se jyada pyar jivan ko hi karte hai..!



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आखरी कुछ मेरी पंक्तियां:


मैने ये jungle poem in hindi कविता इसी लिए लिखी है कि मै लोगों को यही संदेश देना चाहता था कि जो भी लोग पेड़ों की कटाई बड़ी बेरहमी से कर रहे है की उसे आप न करे इससे आप और हम सभी जीवों को भविष्य मे नुकसान हो सकता है। इस पेड़ों को काटना तुरंत छोड़ दो।


यही बात बच्चे हो या बड़े सभी ने सीखनी चाहिए कि पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ।और ये हमारी जंगल की कविता अच्छी लगी हो तो आप इसे शेयर करो और सबको ये प्यार संदेश भेजो।


कीआप सभी जंगल की रक्षा करे और forest poem की माध्यम से प्रेरित होके सभी को बताए।

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