दोस्तो Tea Poem In Hindi कविता मे चाय पर कविता जो लिखी गई है वो सुबह की एक कप चाय की याद दिलाती है जो कि अपने जीवन का एक हिस्सा है और दोस्तों को मिलाने का एक जरिया है ।


सुबह की पहली चाय किसी अजनबी के साथ भी अगर पीली तो भी वह अपना दोस्त जरूर बन सकता है ये है चाय खूबी जो अपने आप मे लाजवाब है ।


इसीलिए चाय पियो और बारिश के मौसम का आनंद भी को ताकि आपको बारिश मे गरमा गरम चाय का आनंद मिल सके ।


सुबह की पहली चाय पर कविता | Tea Poem In Hindi

सुबह की पहली चाय पर कविता | Tea Poem In Hindi | चाय
tea poem in hindi image

चाय पर कविता 


चाय की चुस्की बड़ी छोटीसी,

करे ये अंदर बड़ी गर्मी सी ।


इससे है बड़ी चाहत सी,

लगती है मीठी छुरी सी ।


बनती है बड़ी जल्दी सी,

लगती है होड़ जल्दी मिलने की ।


डलती है इसमें पत्ती थोड़ीसी,

लगती है बिल्कुल देसी सी ।


हर तरफ है तारीफ इसी की,

Favorite है बिल्कुल ये सभी की ।


सुर्र से पी के देखो थोड़ी सी,

Style है ये इसको पीने की ।


चाय की चुस्की बड़ी छोटीसी,

करे ये अंदर बड़ी गर्मी सी ।



Poem on tea in hindi tea poem 


Chai ki chuski badi chhoti si,

Kare ye andar badi garmi si..!


Isse hai badi chahat si,

Lagti hai meethi chhuri si..!


Banti hai badi jaldi si,

Lagti hai hod jaldi milne ki..!


Dalti hai isme patti thodisi,

Lagti hai bilkul desi si..!


Har taraf hai tarif isi ki,

Favorite hai bilkul ye sabhi ki..!


Suuurrr se pike dekho thodi si,

Style hai ye isko pine ki..!


Chai ki chuski badi chhoti si,

Kare ye andar badi garmi si..!



सुबह की चाय पर कविता


सुबह की चाय जब याद आती है,

नींद झटसे खुल जाती है ।


मुंह धोकर बाहर जाते है,

चाय की टपरी पर आते है ।


जल्दी चाय पीने का मन करता है,

चायवाला थोड़ी देर करता है ।


जब चाय ये पास आती है,

मन को बड़ी भा जाती है ।


एक चुस्की जब हम लेते है,

आंखे बंद कर थोड़ा मुस्का जाते है ।


गले से जब उतरती है चाय,

चायवाले को बोलते क्या बनाई है भाई ।


पीके चाय चले जाते है,

दिन की शुरुवात कर जाते है ।


सुबह की चाय जब याद आती है,

नींद झटसे खुल जाती है ।



Morning tea poem in hindi

 

Subah ki chai jab yaad aati hai, 

Neend jhat se khul jaati hai..!


Munh dhokar baahar jaate hai, 

Chai ki taparee par aate hai..!


Jaldi chai peene ka man karta hai, 

Chaiwala thodi der karta hai..!


Jab chai ye paas aati hai, 

Mann ko badee bha jaatee hai..!


Ek chuskee jab hum lete hai,

Aankhe band kar thoda muska jaate hai..!


Gale se jab utaratee hai chai, 

Chai wale ko bolate kya banayi hai bhai..!


Peeke chai chale jaate hai, 

Din ki shuruaat kar jaate hai..!


Subah ki chai jab yaad aati hai, 

Neend jhat se khul jaati hai..!



चाय और तुम कविता


मिलने का तो बहाना होता है,

चाय हमे पीना होता है ।


यारी दोस्ती और एक कप चाय,

पियो इसे एक घूंट में भाई ।


दोस्ती को बढ़ाती चाय,

मिलकर पियो गरमा गरम एक चाय ।


अजनबी को भी दोस्त बनाती चाय,

सबको साथ मिलती चाय ।


अकेलापन दूर करती चाय,

जब रहो सिर्फ तुम और चाय ।


आलस को दूर भगाती चाय,

तरोताजा रखती है ये चाय ।


दिन की शुरुवात करती चाय,

थकान से दूर रखती है चाय ।


मिलने का बहाना एक चाय,

पीना तो हमको है एक चाय ।



Chai hume pina hota hai kavita


Milane ka to bahana hota hai, 

Chai hame peena hota hai..!


Yaari dosti aur ek kap chai, 

Piyo ise ek ghoont mein bhay..!


Dosti ko badhati chai, 

Milakar piyo garma garam ek chai..!


Ajnabi ko bhi dost banati chai, 

Sabako saath milatee chai..!


akelapan dur karati chai, 

Jab raho sirf tum aur chai..!


Aalas ko dur bhagati chai, 

Tarotaaja rakhti hai ye chai..!


Din ki shuruaat karati chai, 

Thakan se door rakhti hai chai..!


Milne ka bahana ek chai, 

Peena to hamako hai ek chai..!



एक कप चाय पर कविता 


मम्मी आयी मम्मी आयी,

एक कप चाय है लायी ।


उसके साथ ब्रेड बिस्कुट भी लायी,

मैने चाय के साथ खाई ।


ख़तम हुई ये चाय रे भाई,

ब्रेड बिस्कुट के साथ रे भाई ।


अब पिनी बस एक कप चाय,

बिना ब्रेड बिस्कुट की एक चाय ।


तभी जोर की बारिश है आयी,

अब बनानी है गरमा गरम चाय रे भाई ।


तब मम्मी ने चाय बनाई,

बारिश में सबको गरम चाय पिलाई ।


रोज एक कप चाय पियो मेरे भाई,

चीनी अदरक दूध वाली ।



Ek cup chai kavita


Mummy aayi mummy aayi, 

Ek kap chai hai laayi..!


Usake saath bread biscuit bhi laayi, 

Maine chai ke saath khayi..!


Khatam hui ye chai re bhai, 

Bread biscuit ke saath re bhai..!


Ab pini bas ek kap chai, 

Bina bread biscuit ki ek chai..!


Tabhi jor ki baarish hai aayi, 

Ab banani hai garma garam chai re bhai..!


Tab mummy ne chai banai, 

barish me sab ko garam chai pilai..!


Roj ek uap chai piyo mere bhai,

Chini adarak doodh vaali..!



चाय पर हास्य कविता 


दीदी ने है चाय बनाई,

पहली चाय हम सबको पिलाई ।


चाय में चीनी पत्ती नही मिलाई,

हम सब से है डांट खाई ।


हम सब से बहाना वो बनाई,

सेहत के लिए चीनी हानिकारक है भाई ।


हमने पूछा पत्ती क्यों नही मिलाई ।

वो हसके बोली रह गयी भाई ।


फिर दोपहर को चाय बनाई,

सबको उसने फिर है पिलाई ।


चाय में चटनी खूब मिलाई,

फिरसे हमसे डांट है खाई ।


मुझको उसके पीछे दौड़ाई,

मिलते ही मुझसे मार है खाई ।


फिरसे उसने चाय बनाई,

मुझसे बोली पीते क्या चाय भाई ।



Funny chai kavita hindi


Didi ne hai chai banai, 

Pehli chai ham sabko pilai..!


Chai me chini patti nahi milai, 

hum sab se hai daant khai..!


Hum sab se bahana vo banai, 

Sehat ke liye chini haanikaarak hai bhai..!


Hamane puchha patti kyon nahi milai, 

Wo has ke boli reh gayi bhai..!


Phir dopahar ko chai banai, 

Sab ko usne phir hai pilai..!


Chai me chatanee khoob milai, 

Phir se humse daant hai khai..!


Mujhako usake peechhe daudai, 

Milte hi mujhse maar hai khai..!


Phir se usne chai banai, 

Mujhse boli peete kya chai bhai..!



चाय पर मारवाड़ी कविता


नींद से प्यारी लगती है चाय,

नींद को करो तुम बाय-बाय ।


सुबह सुबह नींद भी न आये,

जब मिले माँ के हाथ की बनाई चाय ।


जब माँ सब के लिए चाय बनाये,

चीनी,अदरक और दूध खूब मिलाये ।


माँ जब चाय गरमा गरम बनाये,

पापा उसे ठंडा कर जाए ।


माँ जब पापा पर चिल्लाये,

पापा चाय झटसे पी जाए ।


सब अपने अपने काम पे जाए,

शाम को सब घर लौट आये ।


शाम को माँ जब चाय बनाये,

दिनभर की थकान दूर हो जाये ।


ऐसे ही दिन निकलते जाए,

चाय बिना हम रह नही पाए ।


नींद से प्यारी लगती है चाय,

नींद को करो तुम बाय-बाय ।



Neend se pyari lagti hai chai kavita


Neend se pyari lagti hai chai, 

Neend ko karo tum bye-bye..!


Subah subah neend bhi na aaye, 

Jab mile maa ke haath ki banai chai..!


Jab maa sab ke liye chai banaye, 

Chini,adrak aur doodh khub milaye..!


Maa jab chai garma garam banaye, 

Papa use thanda kar jaye..!


Maa jab papa par chillaye, 

Papa chai jhat se pi jaye..!


Sab apne apne kaam pe jaye, 

Shaam ko sab ghar laut aaye..!


Shaam ko maa jab chai banaye, 

Din Bhar ki thakan door ho jaaye..!


Aise hi din nikalte jaye, 

Chai bina hum reh nahi paye..!


Neend se pyari lagti hai chai, 

Neend ko karo tum bye-bye..!




कुछ बाते आखिरी :


Tea Poem In Hindi मे आपको जो भी सीखने को मिला जो कि चाय के साथ हम दोस्तों से और भी नजदीक जा सकते है उनकी परेशानी उसी वक़्त समझ सकते और अजनबी लोगो को दोस्त भी बना सकते है तो क्यों न चाय हमेशा पी जाएं चाहे मिलने के बहाने ही सही ।


Poem on tea in hindi tea poem का यही संदेश है कि एक चाय अगर सबको साथ लेके आ सकती है तो क्यों न पिएं चाय पियो चाय और पढ़ते रहिये हमारा चाय ब्लॉग ।

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